कैसे होती है भारत [ उत्तरप्रदेश ]में धन की खेती // PADDY FORMING IN INDIA
धान की खेती भारत में मई या जून के महीने में की जाती है जिसमे किशन फॉर्मिंग के लिए नर्सरी का उपयोग करता है नर्सरी से लेकर कटाई तक की पूरी जानकारी स्टेप बई स्टेप आपको बताता हु
धन की नर्सरी को कैसे अच्छे से उगाये;=
किसान मई के लास्ट में या जून के पहले सप्ताह में गहन की नर्सरी को उगने की लिए बीज को पानी से भरे खेत में छीट देता है उससे पहले वह उस धन को 1 या 2 दिन तक पानी में रखता है ताकि बीज का अंकुरण हो सके अच्छे से ताकि जो बेकार धन हो वो भी पानी के साथ ऊपर आ जाये और केवल अच्छे धन की ही नर्सरी की जा सके और उसमे लगने वाले खाद को बेकार बीज की वजह से बेकार होता उसे भी रोका जा सके। कुछ लोग धन की नर्सरी के टाइम पर डाया खाद या युरिया का भी भी उपयोग करते है जबकि कही कही पर गोबर की खाद का भी उपयोग किया जाता है अधिकतर लोग धन का छिड़काव शाम को करते है अगर दिन में पहनी को भर कर करे तो धूप की वजह से खेत का पानी गरम हो जाये और बीज का अंकुरण खराब होने का दर रहता है इसलिए बीज का छिड़काव शाम को किया जाता है और सुबह अगर खेत का पानी नहीं सूखा है तो उसे निकाल दिया जाता है ताकि बीज ख़राब न हो उसके बाद उस पर राख का छिड़काव किया जाता है ताकि धूप का प्रभाव कम हो और जब बीज का अंकुरण हो तो तो लगभग २ से ३ दिन बाद ही धीरे - धीरे उसकी सिचाई की जनि चाहिए ताकि बीज अपने स्थान से न हटे नहीं सूख जायेगा और ख़राब हो जायेगा
धुप की वजह से या किसी कारण नर्सरी पीली होने लगे तो उसमे हीरा जिंक नमक दवा का का उपयोग करना चाहिए जो किसी भी नर्सरी या फसल को हराभरा बना देता है जब नर्सरी 15 दिन की हो जाये तो उसके बाद ही थोङा युरिया का उपयोग करना चाहिए या लगभग नर्सरी की लम्बाई 5 से 6 इंच तक हो जाये तो खाद का प्रयोग करना चाहिए और फिर महीने के अंदर ही धन की रोपाई कर देनी चाहिए।
धन की रोपाई से कटाई तक की पूरी जानकारी ;=
जैसे ही नर्सरी 25 से 30 दिन के बीच में हो तो उसकी रोपाई सुरु कर देनी चाहिये क्योकि अगर नर्सरी का टाइम ज्यादा बीत जाता है तो उसमे अच्छे तरह से ज्यादा पौधे नहीं निकलते है और वो पतला ही रह जाता है उसका कीला भी मजबूत नहीं होता है साथ ही साथ उसमे ग्रो करने की वो शक्ति ख़तम हो जाती है जोई आप नर्सरी के महीने वाले पौधों के रोपण में पाते है।
कुछ लोग रोपाई के टाइम पर यूरिया का उपयोग करते है तो कुछ लोग गोबर खाद का उपयोग करते है जबकि कुछ लोग मूंग ,उड़द ,तिल्ली जैंसे हरित खाद का उपयोग करते है
अगर किसी का खेत सूखा है और उसने गर्मी में उस खेत की जुताई की है तो उसे उसकी क्षमता को बनाये रखने केलिए उसमे गोबर की खाद और यूरिया का उपयोग कर सकता है जबकि जो लोग उस खेत की बुवाई किये रहते है तो उन्हें उस खेत को पोनी भर कर जुताई करके 1 या 2 दिन तक छोङ देना चाहिए ताकि वो हरित खेती उस पानी में सड़ सके और वो हरित खाद का उपयोग कर सके या फिर अगर आप उस टाइम ही रोपाई कर देते है तो जैसे जैसे वि सड़ता है वैसे वैसे खेत को हरित खाद पूर्ण मात्रा में मिल सके और वो उस पौधे के लिए बहुत उपयोगी होता है
कुछ ऐसे भी स्थान होते है झा पानी की समस्या होती है वह पर लोग रोपाई के टाइम हरित खाद के साथ लोग यूरिया का भी उपयोग करते है ताकि अगर समय पर सिचाई न हो सके तो यूरिया के प्रभाव से उस मिटटी को कड़वा बनाये रखे ताकि दीमक या कीड़े पैधो को न खाये अब तो नीम पोटेट खादे आने लगी है जो कीड़ो से सुरक्षा के लिए बहुत ही मददगार साबित होती है साथ ही साथ कुछ लोग खेतो की उर्वरा को बढ़ने के लिए डाया नमक खाद का उपयोग करते है उस टाइम जब रोपाई की जाती है
जब धन की रोपाई के 15 से 20 दिन बात जाये अर्थात प्रत्येक पौधों में कई पौधे निकल आये तो उस टाइम थोमा यूरिया खाद का योयोग करना चाहिए आहार पौधों में कीड़े लगे है तो यूरिया की मात्रा कोई बढ़ा कर उसमे पैर एकड़ 5 से 6 पैकेट हीरा जिंक को यूरिया में मिलकर छिड़काव करना चाहिये ताकि कीड़े मर जाये और खेत फिर से हराभरा हो जाये , अगर पानी की समस्या है तो खाद का छिड़काव दोबारा धन की बल निकलतेसे पहले डाल देना चाहिए जब लगे की अब धन की बलिया निकलने वाली है अगर पानी की समस्या नहीं है तो दोबारा न उपयोग करे और समय पर पानी देते रहे।
कभी-कभी जब धन में कई और पौधे निकलते रहते है तो उस पौधों के बीच का जो हिस्सा होता है उसमें कीड़े लग जाते है जिसका पूरा शरीर सफ़ेद होता है जबकि मुँह रेड होता है और वो बीच वाले हिस्से को काट देते है जिससे पूरा पौधा बेकार हो , ये कभी -कभी खेत में ज्यादा नमी की वजह से भी लग जाता है और जब ऐसा लगे की की कीड़े लग गए है कीट नाशक का उपयोग करना चहिये ताकि धन की बलिया अच्छे से निकल सके और समय पर जब फसल पाक जाये तो कतई कर लेनी चहिये जब फ़सल पकने लगे तो उसे पानी से बचाना चाहिए
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