Friday, 28 August 2020

रूस का हाइड्रोजन BOMB , हिरोशिमा ,नागाशाकी से 3333 गुना अधिक शक्तिशाली था जो उस टाइम जापान को 3 बार पूरा बर्बाद था

 रूस का हाइड्रोजन BOMB , हिरोशिमा ,नागाशाकी से 3333 गुना अधिक शक्तिशाली था जो उस टाइम जापान को 3 बार पूरा बर्बाद  था 



          75 वर्ष पहले अमेरिका से जापान के  नागाशाकी पर 2 बेम लिटिलबॉय और FATMAN बेम गिराया था जिससे जापान में लगभग 2.5 लाख लोगो की जाने गयी थी दोनों परमाणु हमले से यह पहली बार और आखिरी बार था जब किसी देश ने युध्य में परमाणु बेम का इस्तमाल किया था 

         क्या  आपको मालूम था की  इस हमले के 15 साल बाद सोवियत संघ ने एक ऐसे ही परमाणु बम का परिक्षण किया था  हिरोशिमा  पर गिराए गए बम का 3333 गुना ज्यादा शक्तिशाली था जो उस  परमाणु बम की अपेक्षा जापान को ३  बार   पूरा नस्ट कर सकता था तब  आबादी 7.5 करोड़ थी तब से लेकर रूस ने अब जाकर 60  वर्ष  बाद वीडियो जारी किया अब तक पूरी दुनिया इस  परिक्षण  से पूर्ण अनभिज्ञ थी  लेकिन जब लोगो को इसके झटके महसूस हुए थे तब सोवियत संघ पर सवाल उठाया गया था लेकिन सोवियत संघ ने साफ तौर पर मना कर  दिया था 

        रूस ने उस साथ साल पहले के वीडियो को अब जारी किया था ये एक हाइड्रोजन बम था रूस का ये परिक्षण पृथ्वी पर हुआ अब तक का सबसे विनाश व विध्वंस नुक्लेअर ब्लास्ट मन जाता है 

       रूस ने यह परिक्षण आर्कटिक महासागर पर एक द्वीप पर 30 अक्टूबर 196 1 को किया था अब तक यह पूरी जानकारी दुनिया के सामने छिपी थी लेकिन यह अब रूस की नुक्लेअर एजेंसी ने यह सार्वजानिक कर दिया है इस परिक्षण से 50 मेगा टन की ऊर्जा उत्त्पन हुयी थी और अब रूस नइ इस पर 40 मिनट की पूरी डॉक्यूमेंट्री फिल्म रिलीज़ कर दी गयी है   रूस में इसे जार बम कहा जाता है जिसका मतलब है '' किंग बम '' यानि  सभी बमो का राजा 

       इस बम को जमींन से 13000 फिट की उचाई से एक हवाई जहाज की सहायता से गिराया गया था और इस तरह टाइमिंग फिक्स्ड की गयी थे की जब बम एक्सप्लोसिव हो तो उस टाइम जहाज बम से 60 किलोमीटर से दूर हो लेकिन बम के फटते ही उसने जहाज को अपनी अघोस में ले लिया था  तब जहाज लगभग 1 से 2 किलोमीटर तक लड़खड़ाया था किसी तरह चालक ने जहाज को बचा लिया था 

       बम के विस्फोट से निकलने वाली ऊर्जा और आग  को  1000 किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था  विस्फोट से निकले वाले धुल के गुबार का व्यास 10 किलोमीटर था उससे निकलने वाली आग और ऊर्जा ने ौरे घुल के गुब्बार को तुरंत ही कवर कर लिया थाऐसे नुक्लेअर मशरूम कहा  जाता है क्योकि  इसका आकर एक मशरूम की तरह था विस्फोट के 30 सेकेंड के बाद यह 40 किलोमीटर फ़ैल गया था और देखते ही देखते 90 किलोमीटर फ़ैल गया था 

      सोचने वाली बात यह है की रूस ने 1961 में यह परिक्षण था  तब से लेकर यह अब तक कितना पावर फुल हइड्रोजन बम होगा ये बात अब दुनिया की समझ से परे दिख रही है 


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